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सभी पात्र आदिवासी हितग्राहियों को वनाधिकार पट्टा दिया जाये

आगर मालवा। आदिम-जाति एवं अनुसूचित-जाति कल्याण मंत्री सुश्री मीना सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वनाधिकार अधिनियम में निरस्त पट्टों की पुन: समीक्षा की जाये और आदिवासियों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाये। कमेटी के सदस्यों के ऐसे प्रयास हो कि कोई भी पात्र हितग्राही वनाधिकार पट्टे से वंचित न रहे। आदिम-जाति कल्याण मंत्री सुश्री मीना सिंह शहडोल में वनाधिकार अधिनियम से संबंधित बैठक को संबोधित कर रही थीं। बैठक में विधायक श्री जयसिंह मरावी, श्रीमती मनीषा सिंह और श्री शरद कोल भी मौजूद थे।
मंत्री सुश्री मीना सिंह ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि महुआ संग्रहण में आदिवासियों पर किसी भी प्रकार की पाबंदी न लगाई जाये। उन्होंने वनाधिकार दावों के निरस्तीकरण की जानकारी संबंधित क्षेत्र के विधायकों को दिये जाने के निर्देश भी दिये। उन्होंने कहा कि यदि वनग्राम के 70 से 80 वर्ष के 2 बुजुर्ग किसी आदिवासी के काबिज रहने की गवाही देते हैं, तो उसे मान्य किया जाये। शहडोल कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह ने बताया कि जिले में वनाधिकार अधिनियम में निरस्त पट्टों की पुन: समीक्षा का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व को निर्देशित किया गया है कि जिन ग्राम पंचायतों में वनाधिकार पट्टे निरस्त हुए हैं, वहाँ के संबंधित वन विभाग के अधिकारियों के साथ स्थल मुआयना करें। बैठक में बताया गया कि जिले में 6 हजार 705 वनाधिकार अधिनियम से संबंधित पट्टे निरस्त हुए हैं। निरस्त दावों की जिला-स्तरीय समिति द्वारा पुन: समीक्षा की जा रही है।

स्कूल यूनिफार्म स्व-सहायता समूह के माध्यम से तैयार करायें

    आदिम-जाति कल्याण मंत्री सुश्री मीना सिंह ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली यूनिफार्म स्व-सहायता समूह के माध्यम से तैयार की जाये। उन्होंने बैठक में निर्देश दिये कि आदिवासी छात्रावास एवं आश्रम में लम्बे समय से कार्यरत अधीक्षकों को हटाकर उनके स्थान पर 5 किलोमीटर परिधि के स्कूलों के अनुसूचित-जाति एवं जनजाति शिक्षकों को अधीक्षक बनाया जाये। आदिम-जाति कल्याण मंत्री ने बैठक में विभागीय गतिविधियों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बस्ती विकास योजना में 20 प्रतिशत कार्यों में विधायक की सहमति प्राप्त की जाये। बैठक में बताया गया कि जिले में प्रधानमंत्री रोजगार कल्याण योजना में 200 सामुदायिक शौचालय बनाने की स्वीकृति दी गई है।

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