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मणिपुर विधानसभा में आज फ्लोर टेस्ट, भाजपा और कांग्रेस ने विधायकों को जारी किया व्हिप

इंफाल।  मणिपुर विधानसभा को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है। मणिपुर विधानसभा में आज फ्लोर टेस्ट आयोजित किया जाएगा। फ्लोर टेस्ट को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने विधायकों को विधानसभा में हाजिर होने के लिए व्हिप जारी किया है। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह(N Biren Singh) द्वारा विधानसभा में विस्ताव प्रस्ताव लाया गया है। इस पर वोटिंग के लिए आज विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराया जाएगा। आज विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान फ्लोर टेस्ट कराया जाएगा।

विश्वास मत पर वोटिंग के जरिए राज्य में भाजपा की गठबंधन सरकार का भविष्य तय होगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने विधायकों को व्हिप जारी किया है। भाजपा ने अपने 18 विधायकों को विधानसभा में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है तो कांग्रेस ने 24 विधायकों को व्हिप जारी किया है।

क्या है विधानसभा की स्थिति ?

मणिपुर विधानसभा की वर्तमान स्थित की बात करे तो 60 सदस्यीय सदन में फिलहाल 53 विधायक मौजूद हैं। तीन विधायकों के इस्तीफे और दलबदल विरोधी कानून के तहत चार सदस्यों की अयोग्यता के बाद विधानसभा में वर्तमान में 53 MLA  हैं। इस बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष  एस टिकेंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार विश्वास मत में जीत हासिल कर लेगी। उन्होंने कहा है कि हमें 30 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है जबकि सदन में फिलहाल गठबंधन की ताकत 29 पर है।

सदन में कांग्रेस लाई थी अविश्वास प्रस्ताव

कांग्रेस ने 28 जुलाई को राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था। कांग्रेस विधायक कीशम मेघचंद्र सिंह, जिन्होंने सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह द्वारा आज सदन में विश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। यह आज सदन के व्यापार एजेंडे में चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

उन्होंने कहा कि  सदन के व्यवसाय के नियमों का स्पष्ट उल्लेख है कि अगर एक ही भावना पर दो अलग-अलग प्रस्ताव है- एक विपक्ष द्वारा स्थानांतरित किया गया और दूसरा अन्य द्वारा सरकार। ऐसे में सरकार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसलिए, कांग्रेस चर्चा में भाग लेगी।

गौरतलब है कि राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर  छह विधायकों के हटने के बाद 17 जून को राजनीतिक संकट गहरा गया।  तीन भाजपा विधायकों ने पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए। हालांकि, बाद में भाजपा नेताओं और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा समेत शीर्ष नेताओं के हस्तक्षेप के बाद चार नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के विधायक गठबंधन में लौटे।

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