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बड़बोले कुरैशी ने पाक को फंसाया, सऊदी अरब को मनाने की कवायद शुरू

अपनी आजादी के 73 साल पूरे होने के साथ ही पाकिस्तान 2 समस्याओं से घिर गया है, एक तरफ पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सार्वजनिक तौर पर सऊदी अरब की आलोचना करके खुद को मुसीबत में फंसा लिया है तो दूसरी तरफ इसराईल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच गुरुवार को हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद पाकिस्तान की स्थिति काफी दुविधाजनक हो गई है।

सऊदी अरब ने कहा-कुरैशी को हटाओ, मनाने निकले बाजवा-अहमद  
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की आलोचना से नाराज हुए सऊदी अरब को मनाने के लिए अब पाक सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और आई.एस.आई. के प्रमुख अहमद सऊदी अरब को मनाने की कवायद के तहत रियाद रवाना हो गए हैं यानी पाकिस्तान में विदेश मंत्रालय का काम अब सीधा सेना और आई.एस.आई. ने अपने हाथ में ले लिया है।
बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी विदेश मंत्री से नाराज सऊदी अरब ने कुरैशी को हटाने के लिए कहा है। पाकिस्तान से नाराज सऊदी अरब ने उसे जल्द से जल्द एक अरब डॉलर का कर्ज चुकाने के साथ-साथ उसकी तेल की आपूर्ति भी रोक दी थी। पाकिस्तान ने तेवर दिखाते हुए सऊदी अरब का कर्ज चुकाने के लिए चीन से कर्ज मांग लिया था। सऊदी अरब पाकिस्तान के इस चीन परस्त रवैये से भी  नाराज है। इस मुद्दे पर भी पाकिस्तानी लीडरशिप की अपने ही घर में आलोचना हो रही है।

क्या कहा था कुरैशी ने
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कश्मीर के मुद्दे पर भारत के खिलाफ इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑप्रेशन (ओ.आई.सी.) के खड़े नहीं होने को लेकर सऊदी अरब की सार्वजनिक तौर पर आलोचना की थी। एक टी.वी. शो के दौरान शाह महमूद कुरैशी ने कहा था, ‘‘मैं एक बार फिर सम्मान के साथ ओ.आई.सी. को विदेश मंत्रियों की काऊंसिल की बैठक बुलाने का अनुरोध कर रहा हूं। अगर आप इसे आयोजित नहीं करते हैं, तो मैं प्रधानमंत्री इमरान खान को उन इस्लामी देशों की बैठक बुलाने को कहने के लिए मजबूर हो जाऊंगा, जो कश्मीर के मुद्दे पर हमारे साथ हैं और उत्पीड़ित कश्मीरियों का समर्थन करते हैं।

पाक के लिए मुसीबत बना इसराईल-यू.ए.ई. समझौता
उधर इसराईल-यू.ए.ई. के मध्य समझौते को लेकर भी पाक के लिए इधर कुआं, उधर खाई वाली स्थिति पैदा हो गई है। पूरे मामले में अमरीका के शामिल होने के कारण पाक इसका खुले तौर पर विरोध नहीं कर पा रहा जबकि पाक में कट्टरपंथी संगठन इसके खिलाफ मोर्चा खोल कर बैठ गए हैं। पाक अखबारों में यह मामला सुर्खियों में है और वह इसे  यू.ए.ई. का मुस्लिम जगत के साथ विश्वासघात बता रही हैं लेकिन पाक विदेश मंत्रालय ने मामले में सधी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस समझौते के दूर तक परिणाम होंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जाहिद हफीज ने कहा कि ‘फिलस्तीनियों के अधिकार में उनके आत्मनिर्णय का अधिकार भी शामिल है और दूसरी तरफ मध्य-पूर्व में शांति और स्थिरता भी पाकिस्तान की प्राथमिकता है’ लेकिन पाकिस्तान के एक बड़े धार्मिक और राजनीतिक संगठन जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम ने कहा कि यू.ए.ई. का इसराईल के साथ समझौते का फैसला इस्लामी अवाम का फैसला नहीं है।

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