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मूर्ति पॉलिटिक्स पर बोले राजवीर सिंह, कहा-ब्राह्मण बुद्धिजीवी होते हैं इन्हें क्या रिझाएंगे?

अलीगढ़: उत्तर प्रदेश में लचर कानून व्यवस्था के चलते प्रदेश में आए दिन लूट, हत्या, रेप, गैंगरेप, अपहरण जैसी वारदातों की बाढ़ आई हुई है। कोई भी दिन ऐसा नहीं है जिस दिन प्रदेश में इस तरह की वारदातें न सामने आए। वैसे तो प्रदेश में हर धर्म-समुदाय के खिलाफ मामले बढ़े हैं लेकिन बीते दिनों जिस तरह से दलितों और ब्रह्मणों पर जुल्म ज्यादती हुई है वह किसी से छिपा नहीं है। दलितों और ब्रह्मणों के वोट को अपने पाले में लाने के लिए पार्टियां कई लोक लुभावने वादे कर रही हैं।

भाजपा के ब्राह्मण वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए सपा-बसपा समेत अन्य विपक्षी पार्टियों ने उन्हें रिझाने में जुट गई हैं। सपा के साथ ही बसपा ने भी सत्ता में आने के बाद भगवान परशुराम की मूर्ति लगवाने के एलान किया है। इस कड़ी में समाजवादी ने एक कदम आगे बढ़ते हुए बाक़ायदा लंबाई चौड़ाई के साथ भगवान परशुराम की मूर्ति लगाए जाने का वादा किया है।

इस रस्साकशी के बीच यूपी के पूर्व सीएम व राजस्थान के पूर्व गवर्नर कल्याण सिंह के पुत्र व एटा लोकसभा सीट से सांसद राजवीर सिंह उफऱ् राजू भैया ने सभी विपक्षी पार्टियों पर इस मुद्दे को लेकर ज़ोरदार कटाक्ष किया है। राजू भैया ने कहा कि ब्राह्मणों को ये लोग क्या रिझाएंगे, ब्राह्मण बुद्धिजीवी होते हैं।

राजू भैया ने कहा कि रामलला का मंदिर माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बन रहा है जिसका शिलान्यास माननीय मोदी जी ने 5 अगस्त को कर दिया है। इन लोगों के पास अब कुछ भी  आधार नहीं बचा है इसीलिए ये लोग अब छोटी राजनीति कर रहे हैं कि हम मूर्ति लगवाएंगे। ब्राह्मणों को रिझाने के लिए ये लोग भगवान परशुराम की मूर्ति लगवाने का दावा कर रहे हैं।

ब्राह्मण बुद्धिजीवी लोग हैं जिनको ये लोग क्या रिझाएंगे? भगवान परशुराम की मूर्ति लगे ये अच्छी बात है और भी महापुरुषों की मूर्ति लगे ये भी अच्छी बात है लेकिन इस समय बीच में अचानक मूर्ति का मुद्दा लाकर उछालने का कोई औचित्य नहीं है। रही बात मथुरा व काशी में संतों द्वारा मंदिर के निर्माण की मांग की तो इसमें मेरा मत ये है कि कानून व माननीय कोर्ट के निर्णय के हिसाब से उसमें कुछ किया जाना चाहिए।

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