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इस बार बप्पा के दर्शन करने मंदिरों में नहीं पहुंचेंगे श्रद्धालु, पहली बार बड़ा गणपति मंदिर दिखेगा सू

इंदौर: प्रदेश में कोरोना महामारी के बाद से ही सरकार द्वारा लॉक डाउन लगाया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे अनलॉक किया जा रहा है, परंतु धार्मिक स्थल अभी भी बंद है। इसके चलते श्रद्धालुओं को गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश के दर्शन और पूजा करने पर प्रतिबंध लगा है, और इस बार मन्दिरों में भी गणेश जी के दर्शन के लिए श्रद्धालु नहीं पहुचेंगे।

इंदौर के अतिप्रचीन मंदिर बड़ा गणपति मंदिर का इतिहास एक स्वप्न से जुड़ा है। मंदिर की आधारशिला के पीछे गणेश के अनन्य भक्त स्व. पं. नारायण दाधीच के द्वारा देखा गया एक स्वप्न है। भगवान गणेश ने नारायण को ऐसी ही मूर्ति के रूप में दर्शन दिए थे स्वप्न की घटना के बाद ही इस भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है। मंदिर का निर्माण कार्य वर्ष 1901 में पं. नारायण दाधीच द्वारा पूरा किया गया था भगवान गणेश जी कि 25 फीट ऊंची प्रतिमा के रूप में दर्शन देते हैं। इस प्रतिमा के निर्माण में चूना, गुढ, रेत, मैथीदाना, मिट्टी, सोना, चांदी, लोहा, अष्टधातु, नवरत्न का उपयोग किया गया है। प्रतिमा के निर्माण में सभी तीर्थ नदियों के जल का उपयोग किया गया है। मूर्ति 4 फीट ऊंचे चबूतरे पर विराजीत है। मूर्ति के निर्माण में करीब 3 साल लगे थे।

मंदिर के पुजारी पंडित धनेश्वर दाधिच ने बताया कि भगवान गणेश का श्रृंगार में करीब 8 दिन का समय लगता है। वर्ष में चार बार यह चोला चढ़ाया जाता है। जिसमें भाद्रपद सुदी चतुर्थी, कार्तिक बदी चतुर्थी, माघ बदी चतुर्थी और बैशाख सुदी चतुर्थी पर चोला और सुंदर वस्त्रों से श्रृंगार किया जाता है चोले में सवा मन घी और सिंदूर का उपयोग किया जाता है। मंदिर के रख रखाव की जिम्मेदारी नारायण दाधीच की तीसरी पीढ़ी के पं. धनेश्वर दाधीच देख रहे हैं पूरे शहर के लोग इस अलौकिक प्रतिमा के दर्शन करने यूं तो सालभर ही जाते हैं। लेकिन गणेश उत्सव के समय यह संख्या हजारों में पहुंच जाती हैं। लेकिन कोरोनावायरस के चलते इस बार मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को नहीं मिलेगी ।

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