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बाढ़ में बह गया नक्सल प्रभाव, जवानों ने जीता आदिवासियों का दिल, आपदा की चपेट में दर्जनों गांव

जगदलपुर। बस्तर के धुर नक्सल प्रभावित इलाकों में इस बार बारिश कहर बनकर टूटी है। दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में हैं। ऐसे में नक्सलियों से लोहा लेने के लिए तैनात अर्धसैनिक बलों के जवान ग्रामीणों के लिए देवदूत बनकर सामने आए हैं। उत्तर भारत के पहाड़ों में बाढ़ के दौरान सीआरपीएफ ने जिस तरह मिसाल पेश की थी। ठीक वैसे ही बस्तर के नक्सल इलाकों में भी बाढ़ राहत कार्य में जवान आदिवासियों का दिल जीत रहे हैं।

लकवाग्रस्त दंपती को किया रेस्क्यू

बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लॉक की पामगल पंचायत में लकवाग्रस्त पति-पत्नी सत्यम सकनी और कमला सकनी बाढ़ में फंस गए थे। चिंतावागू नाले की भयावह बाढ़ की परवाह न करते हुए जवानों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और दंपती को सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचाया। सकनी दंपती ही नहीं इलाके के एसपी कमलोचन कश्यप भी जवानों की तारीफ करते नजर आए।

प्रसव पीडि़ता को पहुंचाया अस्पताल

शनिवार को दंतेवाड़ा जिले के कोंडासावली गांव के डोरेपारा की सोनी को प्रसव पीड़ा हुई। परिजन असहाय थे, क्योंकि भूस्खलन से रास्ता बंद था। ऐसे में सीआरपीएफ 231 बटालियन के जवानों ने महिला को खाट पर लिटाकर पैदल ही कैंप के अस्थाई अस्पताल तक पहुंचाया। जब नवजात की किलकारी गूंजी तो पूरा गांव खुशी से झूम उठा। इससे मिलती जुलती घटना उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में देखने को मिली जब आइटीबीपी के जवानों ने घायल महिला को 50 किमी पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाया।

24 घंटे तैनात हैं एसडीआरएफ के जवान

एसडीआरएफ बीजापुर के जिला सेनानी संजय गुप्ता ने बताया कि उनकी टीम और नगर सेना के जवान 24 घंटे बाढ़ राहत में जुटे हैं। टीम ने 300 लोगों की जान बचाई और एक हजार से ज्यादा लोगों तक भोजन और दवा पहुंचाई है। बस्तर के आइजी सुंदरराज ने कहा कि बाढ़ के दौरान जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना ग्रामीणों की मदद की। ग्रामीण भी जवानों की इस पहल की सराहना कर रहे हैं।

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