Cover

कांग्रेस के अंदर अभी बुझी नहीं है बदलाव की चिंगारी, चिट्ठी लिखने वाले कई नेताओ ने अपनी बात पर अड़े होने की बात दोहराई

नई दिल्ली। कांग्रेस के अंदर बदलाव को लेकर भड़की आग को तो पार्टी ने कुछ भावनात्मक रूप से और कुछ बल प्रयोग से दबा दिया लेकिन चिंगारी बरकरार है। सिर्फ अनुकूल हवा की दरकार है और यह विद्रोह की स्थिति तक भभक सकती है। चिट्ठी लिखकर कांग्रेस की नाजुक स्थिति पर सवाल उठाए जाने के कुछ नेताओं के फैसले पर जारी हमले के जवाब में मंगलवार को फिर से वरिष्ठ नेताओं ने साफ किया कि उन्होंने जो मांग की है वह पार्टी के हित में है। वह अभी भी उस मांग पर डटे हैं। संकेत साफ है कि अबकी कांग्रेस के नेतागण इसे अंजाम तक ले जाना चाहते हैं। कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा, विवेक तन्खा, मुकुल वासनिक जैसे कई नेताओं ने फिर से ट्वीट कर इसी रुख की झलक दिखा दी है।

कांग्रेस के 23 वरिष्ठ नेताओं ने लिखी चिट्ठी

सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सर्वसम्मति से सोनिया गांधी के जिम्मे ही निर्णय लेने की जिम्मेदारी छोड़ दी गई थी और यह भरोसा दिलाया गया कि अगले छह महीने के अंदर बहुत कुछ बदलेगा। लगभग सात घंटे चली कार्यसमिति की बैठक में मुख्य मुद्दा 23 वरिष्ठ नेताओं की ओर से लिखी गई चिट्ठी बन गई थी और बदलाव का मुख्य मुद्दा दब गया था। राहुल गांधी को ही फिर से अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौपने की वकालत करने वाला खेमा पूरे समय हमलावर रहा था। बहरहाल, चिट्ठी लिखने वाले नेताओं के बीच यह संकल्प भी तय दिखता है कि इस लड़ाई को पूरा करना ही होगा। दरअसल दूसरा खेमा उन्हें उकसाने का भी काम करता रहा। बैठक के बाद से मंगलवार तक विभिन्न नेताओं की ओर से चिट्ठी लिखे जाने की आलोचना की जाती रही।

कपिल सिब्बल बोले, पद की ख्वाइश नहीं, देश अहम

मंगलवार को सबसे पहले कपिल सिब्बल ने अपने तेवर का इजहार किया। उन्होंने बिना किसी पृष्ठभूमि के ट्विटर पर लिखा, ‘किसी पोस्ट की कोई लालसा नहीं है, मेरे लिए मेरा देश सबसे अहम है।’ ध्यान रहे कि सोमवार को भी उन्होंने तब राहुल गांधी का नाम लेते हुए तीखी प्रतिक्रिया जताई थी जब यह अटकलें लगी थीं कि राहुल ने इन नेताओं पर भाजपा से साठगांठ का आरोप लगाया है। हालांकि बाद में सिब्बल ने इस ट्वीट को हटा लिया था।

आनंद शर्मा, विवेक तन्खा जैसे नेताओं ने भी ट्वीट के माध्यम से कांग्रेस नेताओं को ही संदेश दिया कि वह बागी नहीं हैं। इन नेताओं ने कहा कि चिट्ठी को बगावत के रूप में नहीं बल्कि पार्टी के हित में देखा जाना चाहिए। पार्टी महासचिव मुकुल वासनिक ने भी जवाब देते हुए कहा- देर सबेर सभी मानेंगे कि चिट्ठी सही मंशा के साथ लिखी गई थी और जो मुद्दे उठाए गए हैं वह सही हैं। ध्यान रहे इन सभी नेताओं ने सोनिया गांधी को लिखे गए पत्र पर हस्ताक्षर किया था

CWC की लंबी बैठक में चिट्ठी के विषय वस्तु पर चर्चा ही नहीं हुई

सूत्रों के अनुसार एक तरफ जहां युवा ब्रिगेड और दूसरे नेता संतुष्ट हैं कि उठने वाली आवाज को दबा दिया गया है। वहीं पत्र लिखने वाले वरिष्ठ नेता इस बात से नाराज हैं कि लंबी बैठक में चिट्ठी के विषय वस्तु पर चर्चा ही नहीं हुई। जैसे पहले होती रही है, उसी तरह बदलाव की हवा को रोकने की कोशिश हुई।

बताया जाता है कि ये नेता अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी एआइसीसी की बैठक का इंतजार कर रहे हैं। अगर उस वक्त भी सार्थक बदलाव नहीं होता है और पार्टी के अंदर नीति व दिशा तय करने के लिए विचार व मंथन की प्रक्रिया शुरू नहीं होती है तो फिर से आवाज उठेगी। वह विद्रोह की स्थिति भी हो सकती है। विवेक तन्खा ने अपने एक ट्वीट में कहा- ‘इतिहास केवल वीरों का याद करता है, कायरों को नहीं।’

स्थायी सदस्य होने पर भी मुझे बैठक में नहीं बुलाया : चाको

कोच्चि : कांग्रेस नेतृत्व को लेकर जारी संकट के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता पीसी चाको ने पूरे विवाद पर सवाल उठाए हैं। चाको ने कहा कि पार्टी के नेता पत्र लिखते हैं और इसे कार्यसमिति की बैठक से एक दिन पहले मीडिया में जारी किया जाता है, जो सही नहीं है।

मंगलवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह कार्यसमिति के स्थायी सदस्य हैं, इसके बावजूद उन्हें बैठक में नहीं बुलाया गया। अगर वह बैठक में गए होते, तो निश्चित ही कुछ समाधान निकालने का प्रयास करते। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में सिर्फ कामचलाऊ तरीके से काम किया जा रहा।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy