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सोयाबीन में तना मक्खी का प्रकोप होने पर कृषक कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी गई सलाह उपयोग में लाए कलेक्टर ने कृषकों के खेतों का भ्रमण कर सोयाबीन फसल का मुआयना किया

आगर-मालवा,

कलेक्टर अवधेश शर्मा ने आज गुरूवार को आगर एवं बड़ौद तहसील के ग्राम कुण्डला, सेमली, मदकोटा सहित अन्य ग्रामों का भ्रमण कर किसानों की सोयाबीन का मुआयना किया। इस दौरान पाया कि तना मक्खी के कारण सोयाबीन फसल में पीलापन आने तथा प्रभावित पौधें के तने को चीरकर देखने पर भूरे रंग का चूर्ण तने में देखने को मिलता है, तना खोखला हो जाता है, धीरे-धीरे पत्तियां पोषक तत्वों की कमी से पीली होने लगती है। साथ ही घेरे के रूप में फसल नष्ट हो रही है।
भ्रमण के दौरान उप संचालक कृषि आरपी कनेरिया एवं कृषि वैज्ञानिक डाॅ. आरपीएस शक्तावत, कृषि विभाग से ए.के. तिवारी, के.आर. साल्मी, अजय कुमार पनिका, एस.एल.आर. राजेश सरवटे, आर.एस. भूरे, किसान नेता डूंगरसिंह, अजय जैन मारूबर्डिया आदि उपस्थित रहे।
कलेक्टर शर्मा ने कृषि विभाग एवं कृषि वैज्ञानिक को निर्देशित किया कि वह जिले के जिन ग्रामों में किसानों के खेतों में तना मक्खी से फसल खराब हो रही है, उनकी फसल बचाने हेतु मक्खी का नियंत्रण करने वाली दवाईयों का छिड़काव करने की सलाह जारी कर, कृषकों से उसके उपयोग के प्रति जागरूकता लाएं। ग्रामीण स्तर पर कृषकों की बैठक लेकर उन्हें सोयाबीन फसल के संबंध में समझाईश दी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि कृषि विभाग का मैदानी अमला अपने क्षेत्रों में किसानों के खेतों का भ्रमण कर, सोयाबीन फसल में तनामक्खी का प्रभाव दिखाई देने पर कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी सलाह उपयोग में लाने को कहे। साथ ही कृषकों को यह सोयाबीन में अन्य किसी ओर प्रकार की समस्या होने पर वह समय-समय पर कृषि विज्ञान केन्द्र से उपयोगी मार्गदर्शन प्राप्त करने को कहे। कलेक्टर ने कृषि विभाग के अधिकारी को निर्देश दिए कि जिले के कृषि आदान विक्रेताओं की बैठक लेकर उन्हें निर्देशित करें कि किसानों के द्वारा फसल संबंधी समस्या बताने पर उन्हें सही-सही एवं उपयोगी दवाईयां ही निर्धारित मूल्य पर दी जाए। अनावश्यक एवं अनुपयोगी दवाई का विक्रय न करें। उन्होंने निर्देश दिए कि कृषकों का क्षेत्रवार वाट्सअप ग्रुप बनाकर उनमें कृषि वैज्ञानिक एवं कृषि अधिकारी जुड़कर आवश्यक एवं उपयोगी सलाह गु्रप के माध्यम से किसानों को समय-समय पर देते रहे।
कलेक्टर श्री अवधेश शर्मा ने जिले के कृषकों से अपील की है कि वे अपने खेतों में सोयाबीन की फसल को तनामक्खी से बचाव एवं नियंत्रण हेतु कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी जाने वाली सलाह अमल लाएं। जिन दवाईयों का जितनी मात्रा में उपयोग करने को कहा जाए, इतनी ही मात्र का छिड़काव कर अपनी फसलों का बचाव करें। साथ ही उन्होंने कहा कि जिले के कृषक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत अपना बीमा 31 अगस्त तक अनिवार्य करवाएं।
कृषकों हेतु उपयोगी सलाह
कृषि वैज्ञानिक डाॅ. आर.पी.एस. शक्तावत द्वारा किसानों को सलाह दी है कि बाजार में उपलब्ध पूर्व मिश्रित लेम्डासाईहेलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत $ थायमिथाॅक्साम 12.6 प्रतिशत की 125 मिली प्रति हेक्टेयर मात्रा अथवा लेम्डासाईहेलोथ्रिन 4.9 एससी 300 मिली प्रति हेक्टेयर दवा 500 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव कर नियंत्रित करें। सफेद मक्खी के शिशु व वयस्क ज्यादा हानि पहुंचाते है जो दिन के समय पत्तियों के निचली सतह पर रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां पीली पड जाती है व मुड जाती है। सफेद मक्खी का प्रकोप 40-60 दिन की सफल में अधिक होता है। नियंत्रण हेतु बुआई पूर्व बीजोपचार हेतु थायोमिथोक्साम 30 एफ.एस. 10 मिली/किग्रा बीज या इमिडाक्लोप्रिड 48 एफ.एस. 1.25 मिली/किग्रा बीज में करे। खडी फसल में प्रकोप होने पर थायोमिथोक्साम 25 डब्ल्यू.जी. 125 ग्राम/है. या थायोमिथोक्साम 12.6 प्रतिशत एवं लेम्डासायहैलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत जेड.सी. मात्रा 200 मिली/है. या बीटासायफ्लूथ्रिन 8.49 प्रतिशत एवं इमिडाक्लोप्रिड 19.8 प्रतिशत मात्रा 300-400 मिली/है का 500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करे। राइजोक्टोनिया राॅट एवं राइजोक्टेानिया एरियल ब्लाईट मिट्टी जनित रोग है जो कि सोयाबीन मे फल व फल्ली की अवस्था में दिखाई देता है। इससे प्रभावित फसल में 30-35 प्रतिशत तक उपज में हानि हो सकती है। तने पर भूरे धब्बे दिखाई देते है। जडे सूख जाती हैं तथा पौधा सूखकर नष्ट हो जात है। नियंत्रण हेतु हैक्साकोनाजोल 5 ई.सी. 800 मिली/है या पाइरोक्लीस्ट्रोबीन 20 डब्ल्यू.जी. 500 ग्राम/है या टेब्यूकोनाजोल 625 मिली/है का 500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करे।

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