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गुलाम नबी आजाद बोले, चिट्ठी लीक होना कोई बड़ी बात नहीं, मंशा कांग्रेस को मजबूत करने की थी

नई दिल्ली। कांग्रेस में चिट्ठी बम से मचे हड़कंप पर पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि राहुल गांधी को पहले चिट्ठी से ऐतराज था। बाद में सोनिया और राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव महीने भर में होने चाहिए, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते ऐसा संभव नहीं है तो हमने सोनिया गांधी से छह महीने अध्यक्ष बने रहने को कहा।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इसमें क्या बड़ी बात है कि चिट्ठी लीक हो गई। पार्टी की मजबूती और चुनाव की मांग करना कोई गुप्त बात नहीं है। इंदिरा गांधी के समय कैबिनेट की कार्यवाहियां तक लीक हो जाया करती थीं। उन्होंने कहा कि जो लोग सीडब्ल्यूसी के दौरान कॉमेंट्री कर रहे थे, क्या वो अनुशासनहीनता नहीं थी। जो लोग हमें गाली दे रहे हैं, क्या वो अनुशासनहीनता नहीं कर रहे। क्या उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। हमने तो किसी को गाली नहीं दी

मंशा कांग्रेस को मजबूत करने की

सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी को लेकर आजाद ने कहा कि मंशा कांग्रेस को मजबूत करने की थी। मैं पिछले 34 साल से वर्किंग कमेटी में हूं। जिनको कुछ भी नहीं मालुम और अप्वाइंटमेंट वाला कार्ड मिल गया वो सब विरोध करते हैं, वो सब बाहर जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोई भी कांग्रेसी जिसको कांग्रेस में जरा सी भी रुचि होती वो तो इस प्रपोजल्स का स्वागत करता।

शिवसेना ने भी उठाए सवाल

इस मुद्दे पर अब अन्य राजनीतिक दल भी चिट्ठी लिखने वाले नेताओं पर अंगलियां उठा रहे हैं। सोनिया गांधी को कांग्रेस के पूर्णकालिक अध्यक्ष के लिए पत्र लिखने वाले 23 नेताओं की शिवसेना ने कड़ी आलोचना की है। शिवसेना ने कहा कि यह राहुल गांधी के नेतृत्व को खत्म करने की साजिश है। शिवसेना के मुखपत्र सामना में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया है कि जब भाजपा राहुल गांधी पर हमला कर रही थी, तब ये नेता कहां थे? जब उन्होंने कांग्रेस की अध्यक्षता छोड़ी थी, तब इन नेताओं ने पार्टी को पुनर्जीवित करने की चुनौती क्यों नहीं स्वीकार की?

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