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चीनी उकसावे को शांत करने के लिए अमेरिका ने दिया एकमात्र यह विकल्प, भारत को आएगा नापसंद!

वाशिंगटन। भारत और चीन के बीच एक लंबे समय से तनातनी चल रही है। कई बार चीन सीमा पर भारत को उकसाने वाला कदम उठा चुका है और तो और वह झड़पों को भी अंजाम दे चुका है। इसको लेकर अमेरिका भी सतर्क है और अपनी नजर दोनों देशों के बीच चल रही गरमा-गरमी पर टिकाई हुई है। हालांकि, जहां अमेरिका को हर वक्त भारत के पक्ष में बयान देते देख गया है, वहीं अब अमेरिका की तरफ से चीन से समझोते के नजरिय में बड़ा बयान आया है। लाजमी है कि यह भारत को नागवार गुजरेगा, क्योंकि हाल ही में गलवन घाटी में चीन द्वारा शुरू की गई हिंसक झड़प में भारत ने अपने 20 जवान खो दिए थे। अमेरिका के राज्य विभाग के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका भारत-चीन सीमा पर स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है और शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद कर रहा है। विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि चीन के उकसावे को रोकने का एकमात्र तरीका बीजिंग के साथ खड़ा होना है

प्रवक्ता ने एएनआई को बताया, ‘जैसा कि सेक्रेटरी पोम्पियो ने कई मौकों पर कहा है, बीजिंग द्वारा स्पष्ट रूप से आक्रामक तरीके से काम करना एक परेशान करने वाली बात है। घरेलू और विदेश दोनों ही मोर्चों पर यह गंभीर बात है।’ उन्होंने आगे कहा कि ताइवान स्ट्रेट से शिनजियांग तक, दक्षिण चीन सागर से हिमालय तक, साइबर स्पेस से लेकर अंतर्राष्ट्रीय संगठनों तक, हम एक ऐसी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ काम कर रहे हैं जो अपने ही लोगों को दबाना चाहती है और अपने पड़ोसियों को धमकाना चाहती है। यह टिप्पणी भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा मंगलवार को पूर्वी लद्दाख के चुमार के सामान्य क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के भारतीय हिस्से में घुसने के चीनी सेना के प्रयास को नाकाम करने के बाद आई है।

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