Cover

इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद भड़काऊ भाषण देने के आरोपी डॉ.कफील देर रात जेल से रिहा

अलीगढ़। बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के लेक्चरर डॉ. कफील खान की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत निरुद्धि मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट से रद होने के बाद उन्हें देर रात करीब 12.15 बजे जेल से रिहा कर दिया गया। विशेष केस को देखते हुए प्रशासन की ओर से यह फैसला लिया गया। अलीगढ़ डीएम चंद्रभूषण सिंह का आदेश मथुरा जेल में शाम तक नहीं पहुंच सका था, इस कारण रिहाई में थोड़ी देर हुई। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ भाषण देने के मामले में वह 29 जनवरी, 2020 से मथुरा जेल में बंद थे।

डॉ. कफील खान के अधिवक्ता इरफान गाजी ने बताया कि रात करीब साढ़े 10 बजे मेरे पास मथुरा जेल से सूचना मिली कि डॉ. कफील को रिहा किया जा रहा है। इसके बाद देर रात उन्हें रिहा कर दिया गया। अधिवक्ता ने कहा कि विशेष केस में ऐसा पहले भी होता रहा है। यदि उन्हें रिहा नहीं किया जाता तो बुधवार दोपहर बाद फिर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाता। डॉ. कफील खान के भाई अकील ने बताया भाई के रिहा होने से पूरा परिवार खुश है। भाई को लेकर दिल्ली जा रहा हूं। मथुरा के थाना सदर इंस्पेक्टर सत्यपाल सिंह ने बताया कि डॉ. कफील खान को जेल से रिहा कर दिया गया है।

बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रासुका के तहत निरुद्धि को अवैध करार देते हुए डॉ. कफील खान को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश हाई कोर्ट ने डॉ. कफील खान की मां नुजहत परवीन की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जिस भड़काऊ भाषण को लेकर डॉ. कफील की रासुका के तहत निरुद्धि की गई है, उसकी प्रति उन्हें नहीं दी गई। भाषण के डिवाइस की कापी भी नहीं दी गई। इससे उन्हें निरुद्धि के खिलाफ सक्षम प्राधिकारी को प्रत्यावेदन देने व सुनवाई के अधिकार से वंचित किया गया है। दो बार निरुद्धि बढ़ाई गई है लेकिन, इस आदेश की प्रति भी नहीं दी गई। केवल टेलीग्राम से सूचित किया गया है। जबकि कानून के तहत आदेश की प्रति दिया जाना चाहिए था। इसके कारण निरुद्धि विधि विरुद्ध व अवैध है।

यह है पूरा मामला : अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 12 दिसंबर, 2019 को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध प्रदर्शन में डॉ. कफील खान, योगेंद्र यादव भी शामिल हुए। आरोप है कि डॉ. कफील खान ने वहां भड़काऊ भाषण दिया। इसके मद्देनजर अलीगढ़ के सिविल लाइंस थाना में एफआईआर दर्ज की गई। 29 जनवरी, 2020 को उन्हें गिरफ्तार करके मथुरा जेल भेज दिया गया। 10 फरवरी को सीजेएम अलीगढ़ ने डॉ. कफील की जमानत अर्जी मंजूर कर ली लेकिन, 13 फरवरी को जिलाधिकारी अलीगढ़ ने रासुका के तहत निरुद्धि का आदेश दे दिया। डॉ. कफील की मां ने रासुका की वैधता को कोर्ट में चुनौती दी थी।

पहले भी भेजे गए जेल : डॉ. कफील खान को इसके पहले भी जेल भेजा गया है। बाबा राघवदास अस्पताल गोरखपुर में ऑक्सीजन की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होने के कारण 10 और 11 अगस्त 2017 को दर्जनों बच्चों की मौत हो गई थी। इस पर डॉ. कफील खान को निलंबित कर दो सितंबर 2017 को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया, बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy