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रविवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा किसान बिल, सरकार को समर्थन की जरूरत

नई दिल्ली: किसानों वाले तीनों बिल (Agricultural Bills) रविवार को राज्यसभा में आएंगे। इन बिलों को रविवार की कार्य सूची में रखा गया है। राज्यसभा में सरकार को बहुमत नहीं है। अकाली दल (SAD) के तीन सांसद हैं जिन्हें बिलों के खिलाफ वोट करने के लिए पार्टी ने व्हिप जारी किया है। इन बिलों को पारित कराने के लिए बीजेडी, एआईएडीएमके, वायएसआर कांग्रेस और टीआरएस आदि पार्टियों का समर्थन चाहिए।

आक्रामक विपक्ष वॉकआउट के बजाए वोटिंग की रणनीति बना रहा है ताकि समर्थन कर रहे दलों को किसान विरोधी साबित किया जा सके। राज्यसभा में बिल को सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग उठाई जाएगी। अगर सरकार संख्या बल नहीं जुटा पाई तो उसे बिल कमेटी में भेजने पर विवश होना पड़ सकता है। यह विपक्ष की नैतिक जीत मानी जाएगी।

गौरतलब है कि विवादित कृषि विधेयकों को लेकर गुरूवार को अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बताया कि वह चाहती थीं कि सरकार इन विधेयकों को सदन में पेश करने से पहले किसानों से बात करे। हरसिमरत कौर ने यहा भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को आगे ले जाने के लिए बहुत मेहनत कर रहे हैं और हम उनकी नीतियों को “किसान विरोधी” नहीं मानते हैं।

अकाली नेत्री हरसिमरत कौर ने कहा कि ”मैं लगातार किसानों की बात केंद्र तक और केंद्र की बात किसानों, किसान संगठनों तक पहुंचाती रही। लेकिन शायद मैं सरकार को अपनी बात समझाने में विफल रही।” हरिसमरत कौर ने कहा, “अध्यादेश बनने से पहले जब ये मेरे पास आया था तो मैंने ये कहा था कि किसानों के मन में इसे लेकर शंकाए हैं। इन शंकाओं को दूर करना चाहिए। राज्य सरकारों को भी विश्वास में लेकर ऐसी कोई कार्रवाई होनी चाहिए। ये विरोध मैंने मई में दर्ज किया।”

उन्होंने कहा कि “इसके बाद जून में जब अध्यादेश आया उससे पहले भी मैंने कैबिनेट में कहा कि जमीन स्तर पर किसानों में इस अध्यादेश को लेकर बहुत विरोध है उनको विश्वास में लेकर ही कोई अध्यादेश आए। जब ये अध्यादेश कैबिनेट में पेश किया गया आया तब भी मैंने इसे पूरे जोरों से उठाया।”

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