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उत्तर प्रदेश में भी सड़कों पर उतरे किसान, रास्ता जाम करने की कोशिश

नई दिल्ली। कृषि बिल को लेकर में आज देशभर में किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन समेत विभिन्न किसान संगठनों ने आज देशभर में चक्का जाम करने का एलान किया है। इसमें 31 संगठन शामिल हो रहे हैं। किसान संगठनों को कांग्रेस, आरजेडी, समाजवादी पार्टी, अकाली दल, टीएमसी समेत कई पार्टियों का साथ भी मिला है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कृषि संबंधी विधेयकों को लेकर ट्रैक्टर रैली निकाली है। इससे पहले पंजाब में तीन दिवसीय रेल रोको अभियान की गुरुवार से शुरुआत हो गई है। किसान रेलवे ट्रैक पर डटे हुए हैं और बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर हरियाणा, पंजाब और खासतौर से पश्चिम बंगाल में देखने को मिल सकता है। इसके अलावा अन्य राज्यों के साथ राजनीतिक दल भी विधेयक के विरोध में सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं।

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उत्तर प्रदेश में किसानों ने पराली जलाई

उत्तर प्रदेश में राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी, सीतापुर तथा रायबरेली के अलावा पश्चिमी यूपी में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान कई जगहों पर पराली जलाई गई है। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई है। कई जगह पर सड़क जाम करने का प्रयास भी किया गया है। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी किसान इसके विरोध में सड़क पर उतरे हैं।

नोएडा में दिल्ली बॉर्डर के पास किसानों ने ब्लॉक की सड़कें

नोएडा में दिल्ली बॉर्डर के पास भारतीय किसान यूनियन के सदस्यों ने रोड ब्लॉक कर दी है। नोएडा के पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम ट्रैफिक डायवर्ट कर रहे हैं ताकि लोगों को असुविधा ना हो।”

पंजाब में बाजार और यातायात ठप

पंजाब में भारत बंद के तहत बाजार और दुकानें बंद हैं। इसके अलावा सड़क और रेल यातायात भी ठप है। प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा-व्यवस्था के कड़े इंतेजाम किए गए हैं। अमृतसर में किसानों के बंद के समर्थन में पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार हरदीप गिल और अनीता देवगन भी पहुंचे और प्रदर्शन किया।

दिल्ली-यूपी सीमा पर अतिरिक्त पुलिस की तैनाती

किसानों के देशभर में भारत-बंद के ऐलान के मद्देनजर दिल्ली-यूपी सीमा पर अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। दिल्ली बॉर्डर पर कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था की गई है।

ना दाम मिलेगा, ना सम्मान : प्रियंका गांधी

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि किसानों से एमएसपी छीन ली जाएगी। उन्हें कांट्रेक्ट फार्मिंग के जरिए खरबपतियों का गुलाम बनने पर मजबूर किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि ना दाम मिलेगा ना सम्मान। किसान अपने ही खेत पर मजदूर बन जाएगा। भाजपा कृषि बिल ईस्ट इंडिया कंपनी राज की याद दिलाता है। हम ये अन्याय नहीं होने देंगे।

बिहार में तेजस्वी यादव की ट्रैक्टर रैली

किसानों के विरोध प्रदर्शन में नेता भी शामिल हो रहे हैं। इसी क्रम में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कृषि बिल के खिलाफ ट्रैक्टर रैली निकाली है। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार ने हमारे अन्नदाता को निधि दाता के जरिए कठपुतली बना दिया है। उन्होंने कहा कि कृषि बिल किसान विरोधी। सरकार ने कहा था कि वे 2022 तक किसानों की आय दोगुना करेंगे, लेकिन ये बिल उन्हें और गरीब बना देगा। आरजेडी नेता ने कहा कि कृषि क्षेत्र का कॉर्पोरेटकरण किया गया है।

अमृतसर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग किया ब्लॉक

पंजाब के जालंधर में फिलौरी के पास किसानों ने अमृतसर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग को ब्लॉक कर दिया है। पंजाब में भारत बंद के मद्देनजर सभी मार्केट एसोसिएशन ने दुकानें बंद रखने को कहा है। इस दौरान सिर्फ जरूरी सेवाएं दी जाएंगी।

कर्नाटक में किसानों का प्रदर्शन

कर्नाटक स्टेट फार्मर्स एसोसिएशन के सदस्य बोम्मनाहली (Bommanahalli) में बिल को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था और कोरोना सुरक्षा नियमों को बनाए रखने के लिए क्षेत्र में पुलिस को तैनीत कर दिया गया है।

पंजाब में रेल ट्रैक पर बैठे किसान

पंजाब के अमृतसर में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के लोगों का ‘रेल रोको’ आंदोलन जारी है। यहां किसानों ने 24 सितंबर से आंदोलन शुरू किया था जो 26 सितंबर तक चलेगा। आंदोलन के मद्देनजर फिरोजपुर रेल मंडल ने एहतियत के तौर पर अमृतसर से चलने वाली सभी 14 स्पेशल ट्रेनों को 24 सितंबर से 26 सितंबर रात 12 बजे तक के लिए रद कर दिया है

गौरतलब है कि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल बिल का विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस ने इस बिल को संघीय ढांचे के खिलाफ और असंवैधानिक करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इन काले कानूनों को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। वहीं, अभिषेक मनु सिंघवी का आरोप है कि विधेयकों के जरिए सरकार ने देश में नई जमींदारी प्रथा का उद्घाटन किया है और इससे मुनाफाखोरी को बढ़ावा मिलेगा।

क्या है किसानों की चिंता

किसानों की असली चिंता एमएसपी (MSP) को लेकर है। कृषि मंडियों को लेकर है। उन्हें डर है कि नए बिल के प्रावधानों की वजह से कृषि क्षेत्र पूंजीपतियों और कॉर्पोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा। कुछ संगठन और सियासी दल चाहते हैं कि एमएसपी को बिल का हिस्सा बनाया जाए ताकि अनाज की खरीदारी न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे ना हो। जबकि सरकार साफ-साफ कह चुकी है कि एसएसपी और मंडी व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी।

संसद के दोनों सदनों ने जिन दो विधेयकों पर मुहर लगाई है, उनमें पहला कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 और दूसरा कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 शामिल हैं। इन्हीं दोनों बिल को लेकर किसान सड़क पर हैं।

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