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5जी के खिलाफ आज भारत समेत दुनिया के कई हिस्‍सों में प्रदर्शन, रेडिएशन के घातक प्रभाव को लेकर लोगों में डर

मुंबई। ऐसे में जब दुनिया के दिग्‍गज देश 4जी नेटवर्क के बाद 5जी यानी पांचवीं पीढ़ी के नेटवर्क को लेकर आतुर हैं। इसके कथित दुष्‍प्रभावों की आशंका को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से पुरजोर विरोध की आहट भी सुनाई देने लगी है। अग्रेजी अखबार मिड-डे की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कई हिस्‍सों में शनिवार को 5जी नेटवर्क के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होने जा रहा है। यही नहीं मुंबई की सेलफोन रेडिएशन विरोधी लॉबी भी इन प्रदर्शनों में शरीक होगी। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को 5जी नेटवर्क लाने से पहले इसके दुष्‍प्रभावों और सुरक्षा को लेकर अध्‍ययनों पर भी गौर करना चाहिए।

हमारे स्वास्थ्य के बारे में भी सोचें 

रिपोर्ट के मुताबिक, ये विरोध प्रदर्शन वर्चुअल भी होंगे। सामाजिक कार्यकर्ता इन प्रदर्शनों को लेकर तैयारियां कर रहे हैं। वे 5जी नेटवर्क से होने वाले रेडिएशन पर केंद्र‍ित तख्तियां और बैनर तैयार कर रहे हैं। 5जी नेटवर्क के खिलाफ लोग जानकारियां और अपनी प्रतिक्रियाएं team@stop5ginternational.org पर भेज रहे हैं। मालबार हिल के निवासी प्रकाश मुंशी कहते हैं कि हमारी चिंता भी समान है। हम सबसे पहले 5जी के बारे में जागरूकता पैदा करना चाहते हैं। यह 4जी से छोटा कदम नहीं है लेकिन हमारे स्वास्थ्य के बारे में भी चिंता की जानी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि 5जी नेटवर्क के चलते पैदा हुए रेडिएशन का स्‍वास्‍थ्‍य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा

प्रयोगशालाओं के चूहों की तरह किया जा रहा ट्रीट 

प्रकाश मुंशी ने सवाल किया कि आखिर क्‍यों हमारी सरकार और इंडस्‍ट्री बिना परीक्षण किए ही हम पर यह टेक्‍नोलॉजी थोपना चाहती हैं। क्‍यों नागरिकों को प्रयोगशालाओं के चूहों की तरह ट्रीट किया जा रहा है। चिंता की बात यह है कि हमारे पास जो तकनीक आ रही है उसका कोई विशेष अध्ययन नहीं किया गया है। हमारी विनम्र गुजारिश है कि दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियां नागरिकों के स्वास्थ्य की कीमत पर धन कमाने की कोशिश ना करें। एक समय ऐसा आएगा जब आपकी तकनीक का इस्‍तेमाल करने के लिए कोई नागरिक नहीं बचेगा… तब आप 5जी किसे बेचेंगे।

दुष्‍प्रभावों को लेकर हो अध्‍ययन 

अंधेरी लोखंडवाला के सुरजीत सिंह दादियाला कहते हैं कि यह विरोध प्रदर्शन इसलिए होने जा रहा है क्‍योंकि 5G के प्रतिकूल प्रभावों को लेकर कोई विशिष्‍ठ अध्‍ययन नहीं किया गया है। हम नई तकनीक को अपनाने के खिलाफ नहीं हैं। हम मौजूदा वक्‍त में इसकी अहमियत को बखूबी समझते हैं लेकिन हमारी कोशिश सरकार का ध्‍यान इस बात की ओर आकर्षित करने पर है कि ऐसे में जब 135 करोड़ की आबादी वाला यह देश कोरोना संकट से पहले ही जूझ रहा है तो इस नई तकनीक को अपनाने से पहले इसके दुष्‍प्रभावों की आशंका को लेकर मुकम्‍मल अध्‍ययन कर लिया जाना चाहिए।

कैंसर जैसी बीमारियों पर भी डालें नजर

सुरजीत सिंह दादियाला ने कहा कि हमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों पर भी नजर डालनी होगी। मौजूदा वक्‍त में किस तेजी के साथ यह जानलेवा बीमारी (कैंसर) लोगों को अपनी गिरफ्त में लेती जा रही है। वैसे भारत में दूरसंचार टावरों से होने वाले रेडिएशन के मसले पर बीते कुछ वर्षों से अहमदाबाद में भी प्रदर्शन हो रहे हैं। अहमदाबाद के निशीथ पटेल कहते हैं कि हम भी मुंबई के सामाजिक कार्यकर्ताओं के संपर्क में हैं। हम भी वर्चुअल प्रदर्शनों में पोस्‍टर बैनर अपलोड करेंगे। बता दें कि 5जी नेटवर्क से होने वाले कथित रेडिएशन के दुष्‍प्रभावों को लेकर पहले भी कई रिपोर्टें आ चुकी हैं।

मोबाइल टावरों की संख्या बढ़ेगी

बीते दिनों समाचार एजेंसी आइएएनएस ने अपनी एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से बताया था कि इस नेटवर्क का प्रसार होने के बाद मोबाइल टावरों की संख्या बढ़ेगी। यही नहीं आरएफ सिग्नल की ताकत बहुत ज्यादा होती है जिसके विकिरण से स्वास्थ्य खराब होने की आशंका भी है। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना था कि जब तक नियामक प्राधिकरणों द्वारा निर्धारित सुरक्षा के मानकों का पालन होगा तब तक आरएफ से डरने की जरूरत नहीं है। बताया जाता है कि 5जी की गति 4जी के मुकाबले कई गुना ज्यादा होगी जिसके लिए तीव्र विकिरण की जरूरत होती है।

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