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आदिवासी क्षेत्रों में प्रवासी मजदूरों को स्व-सहायता समूह के माध्यम से मिलेगा रोजगार — केन्द्र सरकार ने मंजूर की 65 करोड़ रुपये की योजना

भोपाल । प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में प्रवासी आदिवासी मजदूरों और महिलाओं को स्व-सहायता समूह की गतिविधियों से जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जाने के प्रयास किये जायेंगे। इसके लिये केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय ने प्रदेश की 65 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। यह जानकारी प्रमुख सचिव, आदिम-जाति कल्याण पल्लवी जैन गोविल की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई बैठक में दी गई। प्रमुख सचिव ने विभिन्न जिलों के अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से चर्चा की। बैठक में संचालक, आदिवासी क्षेत्रीय विकास योजना शैलबाला मॉर्टिन, ग्रामीण आजीविका मिशन, मेपसेट, कौशल विकास और बैंकर्स भी मौजूद थे।

प्रमुख सचिव, आदिम-जाति कल्याण गोविल ने बताया कि प्रदेश में रोजगार सेतु एप के माध्यम से प्रवासी मजदूरों के कौशल के अनुसार सर्वे किया गया है। इसके माध्यम से उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जायेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास किये जायें, जिससे प्रवासी मजदूरों और उनके परिवार को जल्द से जल्द आर्थिक लाभ मिलना शुरू हो जायें। प्रमुख सचिव ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में शैक्षणिक संस्थान हैं। इनमें होने वाली गतिविधियों से भी स्व-सहायता समूहों को जोड़ा जा सकता है।

बैठक में पशु एवं मत्स्य-पालन, पोल्ट्री फार्म, डेयरी से जुड़ी अन्य गतिविधियों, खाद्य प्र-संस्करण, रेशम और मधुमक्खी-पालन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित किये जाने पर चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि सीधी जिले में 31 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक जिले में लौटे हैं। धार जिले में करीब 34 हजार प्रवासी मजदूर जिले में लौटे हैं। इन्हें रोजगार से जोड़ने के लिये मनरेगा में सर्वे का कार्य किया गया है। आयुक्त, आदिम-जाति कल्याण बी. चन्द्रशेखर ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में पूर्व में तैयार शेड का उपयोग इन गतिविधियों से जोड़ने के लिये किया जा सकता है। बैठक में जिला अधिकारियों को योजना के संबंध में प्रस्ताव देने के निर्देश दिये गये।

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